रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के नाम पर वर्षों से चल रहे फर्जी CBSE स्कूलों और प्राइवेट स्कूल माफियाओं के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के स्पष्ट निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग ने सत्र 2026-27 के लिए एक अहम आदेश जारी किया है, जिसे शिक्षा व्यवस्था में “सर्जिकल स्ट्राइक” के रूप में देखा जा रहा है। इस आदेश के अनुसार, राज्य में संचालित और छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) से मान्यता प्राप्त हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की कक्षा 1, 2, 3, 4, 6, 7, 9 और 11वीं की वार्षिक परीक्षाओं का संचालन अब संबंधित स्कूल नहीं, बल्कि सीधे जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) करेंगे।
क्यों है यह फैसला इतना बड़ा
जानकारों के मुताबिक, प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे निजी स्कूल संचालित हो रहे थे जो CBSE के नाम का दुरुपयोग कर रहे थे, जबकि उनकी वास्तविक मान्यता CGBSE की थी। इन स्कूलों द्वारा
मनमानी फीस वसूली परीक्षा परिणामों में हेरफेर, अभिभावकों को गुमराह करना, नियमों की खुलेआम अनदेखी जैसी गंभीर शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं।
तीन साल की लड़ाई के बाद मिला परिणाम
इस पूरे मुद्दे को पिछले तीन वर्षों से लगातार उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता व जनसेवक विकास तिवारी ने इस फैसले को लाखों छात्रों की जीत बताया है। उन्होंने कहा— “मैंने पूरे छत्तीसगढ़ के नागरिकों से वादा किया था कि सत्र 2026-27 में फर्जी CBSE स्कूलों को बंद करना ही पड़ेगा। आज वह वादा पूरा होता दिखाई दे रहा है।”
विकास तिवारी ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री ने मेरी नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं की आवाज सुनी है और शिक्षा माफियाओं पर सीधा प्रहार किया है।”
लड़ाई अभी बाकी है
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कई मामलों में अभी जांच और कार्रवाई बाकी है। निजी स्कूल माफियाओं के पास धन, ताकत और राजनीतिक पहुंच है
लेकिन “मेरे पास बच्चों की दुआएं, हिम्मत और सच्चाई है। हर बच्चा भगवान का रूप है और उसी के आशीर्वाद से यह संघर्ष जारी रहेगा।”

