प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना; सूबे के 4 जिलों में 178.37 करोड़ रुपये के फसल बीमा दावों का निपटारा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना; सूबे के 4 जिलों में 178.37 करोड़ रुपये के फसल बीमा दावों का निपटारा

नई दिल्ली/ रायपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के किसानों को व्यापक लाभ मिला है। वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान राज्य के कांकेर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कांकेर, बालोद, धमतरी और कोंडागांव जिलों में कुल 178.37 करोड़ रुपये के फसल बीमा दावों का निपटान किया गया है, जिससे 4.72 लाख से अधिक किसान आवेदन लाभान्वित हुए हैं।

यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने संसद में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। प्रश्न संसद सदस्य श्री भोजराज नाग, श्री विजय कुमार दूबे, श्री अरविंद धर्मापुरी, श्री विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी एवं श्री नलिन सोरेन द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन, दावों के निपटान और पारदर्शिता को लेकर पूछा गया था।

उन्होने बताया कि छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में 33.25 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान कर 90,668 किसानों, धमतरी में 26.72 करोड़ रुपये से 1,28,511 किसानों, कांकेर में 102.57 करोड़ रुपये से 2,15,190 किसानों तथा कोंडागांव में 15.83 करोड़ रुपये से 37,937 किसानों को लाभ पहुंचाया गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, जिसकी शुरुआत वर्ष 2016-17 में की गई थी, राज्यों और किसानों दोनों के लिए स्वैच्छिक है तथा यह ‘क्षेत्र दृष्टिकोण’ पर आधारित है। योजना के अंतर्गत बुवाई से लेकर फसलोपरांत अवधि तक गैर-निवारणीय प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को व्यापक जोखिम कवरेज बहुत कम प्रीमियम पर प्रदान किया जाता है। स्वीकार्य दावों का भुगतान राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस पोर्टल) के माध्यम से डिजीक्लेम प्रणाली द्वारा सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाता है।

मंत्री ने बताया कि ओलावृष्टि, बाढ़, भूस्खलन, बादल फटना, प्राकृतिक आग जैसी स्थानीय आपदाओं तथा चक्रवात और बेमौसम बारिश से होने वाले फसलोपरांत नुकसान के लिए अलग से प्रावधान किए गए हैं। ऐसे मामलों में राज्य सरकार और बीमा कंपनी की संयुक्त समिति द्वारा निर्धारित समय-सीमा में नुकसान का आकलन किया जाता है। सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि अतीत में कुछ मामलों में दावों के भुगतान में विलंब की शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनके प्रमुख कारण राज्य सरकारों द्वारा प्रीमियम सब्सिडी में देरी, बैंकों द्वारा प्रस्तावों की त्रुटिपूर्ण प्रस्तुति तथा उपज आंकड़ों में विसंगतियां थीं। इन समस्याओं के समाधान के बाद लंबित दावों का निपटान किया गया।

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