50 टन कोयला बरामद
रायगढ़। झारखंड और पश्चिम बंगाल की तरह अब छत्तीसगढ़ में भी कोल माफिया पैदा होने लगे हैं। रायगढ़ जिले में धरमजयगढ़ और घरघोड़ा के अंदरुनी जंगली क्षेत्रों में पोकलेन मशीन लगाकर समानांतर कोयला खदान संचालित किया जा रहा है। लंबे समय से यह काम चल रहा था। इसकी सूचना पर प्रशासन ने छापा मारकर बोरो क्षेत्र में एक पोकलेन को जब्त किया है। मौके पर करीब 50 टन कोयला भी मिला है।
बहुत ही कम खुदाई में निकल रहा है कोयला
दरअसल रायगढ़ जिले में धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार का बहुत बड़ा क्षेत्र अब भी अनएक्सप्लोर्ड है। यहां का कोयला भंडार आने वाले दिनों में विधिवत आवंटन के बाद निकाला जाएगा, लेकिन उसके पहले ही खनन माफिया खुद ही कोयला निकालने में जुट गए हैं। कुछ क्षेत्रों में कोल सीम के ऊपर ओवरबर्डन याने मिट्टी की मोटाई बेहद कम है। यही वजह है कि यहां बड़ी आसानी से जेसीबी, पोकलेन लगाकर खनन किया जा सकता है। चंद मीटर खोदने पर ही कोयला निकल जाता है।
लीक हो गई थी छापे की सूचना..?
धरमजयगढ़ के बोरो इलाके में भी जंगल के पास कोयला खनन किया जा रहा है। इस सूचना पर खनिज निरीक्षक आशीष गढ़पाले के नेतृत्व में जब पुलिस, वन विभाग और जिला खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने इलाके में दबिश दी। वहीं निरीक्षण के दौरान जो दृश्य सामने आए, वे किसी सुनियोजित लूट से कम नहीं थे। नाले के किनारे और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन के निशान साफ दिखाई दिए। कोयले के भंडारण के प्रमाण भी मिले, मगर सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही जेसीबी मशीन को मौके से हटा लिया गया था। यह महज संयोग नहीं हो सकता। सवाल उठना लाजमी है कि आखिर सूचना लीक किसने की? क्या खनन माफिया को पहले से भनक थी? क्या इस काले खेल में अंदरखाने किसी की मिलीभगत है?
छिपाकर रखी गई मशीन बरामद
हालांकि यह कार्रवाई पूरी तरह निष्फल नही रही। तलाशी के दौरान अधिकारियों ने उसी इलाके में छिपाकर रखी गई एक चैन माउंटेन मशीन बरामद कर ली। बताया जा रहा है कि इसी दैत्याकार मशीन से अवैध कोयला उत्खनन का काम धड़ल्ले से चल रहा था। मशीन की बरामदगी ने यह साबित कर दिया कि यह गतिविधि न तो छोटी थी और न ही छिपी हुई थी।
प्लांटों में बेचा जा रहा कोयला
मिली जानकारी के मुताबिक ट्रेलर के माध्यम से कोयला प्लांटों में बेचा जा रहा था। बाद में जब शिकायत हुई तब कलेक्टर के निर्देश पर संयुक्त जांच टीम ने कार्रवाई की है। खनिज विभाग ने प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है।
स्थानीय ग्रामीणों का दर्द आया सामने
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अब ग्रामीणों का दर्द भी सामने आया है। इनका कहना है कि भारी मशीनों की कर्कश आवाजें, रात-दिन चलती हलचल और ट्रैक्टरों की आवाजाही लंबे समय से शक पैदा कर रही थी। लेकिन शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई न होने से अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद होते गए। अब प्रशासन ने मशीन जब्त कर ली है और वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुट गई हैं कि इस अवैध खनन के पीछे कौन चेहरे हैं, किसके संरक्षण में यह धंधा फल-फूल रहा था, और कब से धरती की यह लूट जारी थी। बहरहाल इस कार्रवाई के बाद इलाके में खलबली मच गई है। कोयला माफिया के नेटवर्क में बेचैनी साफ देखी जा सकती है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। सवाल यह है क्या इस बार सच पूरी तरह बाहर आएगा, या फिर यह मामला भी धूल में दबा दिया जाएगा?

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