बाल विवाह रोकथाम को लेकर सरपंचो एवं सचिवों का दो दिवसीय उन्मुखीकरण

बीजापुर । कलेक्टर  संबित मिश्रा के निर्देशन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान अंतर्गत बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए 23 एवं 24 मार्च 2026 को जिले के समस्त ग्राम पंचायतों के सरपंचों एवं सचिवों का दो दिवसीय उन्मुखीकरण कार्याशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उददेश्य बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से समाप्त करने हेतु ग्राम स्तर पर प्रभावी रणनिति तैयार करना एवं इसे जनआंदोलन का रूप देना रहा है। कार्यक्रम में राज्य स्तर से मास्टर ट्रेनर  शंशाक शर्मा द्वारा बाल विवाह के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों, बाल संरक्षण तंत्र की भूमिका एवं समुदायिक सहभागिता के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक समस्या नही है बल्कि यह बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा एवं भविष्य पर गहरा प्रभाव डालता है।
ग्राम पंचायतो मे जनआंदोलन कैसे बनाए इसके लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये गए बाल विवाह रोकथाम को केवल शासकीय कार्यक्रम न मानकर जनभागीदारी के माध्यम से जनआंदोलन ग्राम स्तर पर निगरानी तंत्र प्रत्येक ग्राम पंचायत में बाल विवाह रोकथाम समिति का गठन कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा, शिक्षक, कोटवार एवं युवा प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए गांव-गांव में रैलियाँ, दीवार लेखन, नुक्कड़ नाटक एवं ग्राम सभाओं के माध्यम से बाल विवाह के दुष्परिणामों की जानकारी दी जाए।
स्कूल एवं किशोर समूहों की भूमिका- विद्यालयों में बाल अधिकार एवं बाल विवाह निषेध विषय पर विशेष सत्र आयोजित कर बच्चों को जागरूक किया जाए ताकि वे स्वयं भी इसके खिलाफ आवाज उठा सकें। सूचना एवं त्वरित कार्यवाही किसी भी संभावित बाल विवाह की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को देने हेतु ग्राम स्तर पर हेल्पलाइन व संपर्क व्यवस्था सुदृढ़ की जाए।
सामाजिक एवं धार्मिक नेतृत्व की भागीदारी- गांव के प्रभावशाली व्यक्तियों, पुजारियों एवं समुदाय के वरिष्ठजनों को इस अभियान से जोड़कर सामाजिक समर्थन सुनिश्चित किया जाए।
प्रोत्साहन एवं सम्मान- बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहित कर सम्मानित किया जाए जिससे अन्य पंचायतें भी प्रेरित हों। कार्यक्रम में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह रोकथाम में सरपंच एवं सचिव की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि ग्राम स्तर पर समय रहते हस्तक्षेप किया जाए तो इस कुप्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। उन्मुखीकरण कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने ग्राम पंचायतों में बाल विवाह रोकथाम को प्राथमिकता देते हुए इसे जनांदोलन का रूप देने का संकल्प लिया। जिले में इस पहल से बाल विवाह मुक्त समाज की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। इस दौरान महिला एवं बाल विकास अधिकारी  कांता मसराम, जिला बाल संरक्षण अधिका  राहुल कौशिक एवं समस्त अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।

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