पशुपालन में नवाचार: किसानों ने सीखा हरे चारे को ‘सायलेज’ के रूप में सुरक्षित रखने का हुनर

पशुपालन में नवाचार: किसानों ने सीखा हरे चारे को ‘सायलेज’ के रूप में सुरक्षित रखने का हुनर

महासमुंद। हरे चारे के सायलेज निर्माण एवं पशुपालन प्रबंधन की तकनीकी जानकारी प्रदान करने जिले के 30 कृषक पशुपालकों का शैक्षणिक भ्रमण टांक डेयरी फार्म, सेमरिया एवं शासकीय पशु प्रजनन प्रक्षेत्र, चंदखुरी में कराया गया। इस भ्रमण दल में 10 महिला कृषक भी शामिल रहीं।
उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. अंजना नायडू ने बताया कि भ्रमण के दौरान कृषकों को बारहों माह हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सायलेज निर्माण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। सायलेज हरे चारे जैसे मक्का, ज्वार एवं बाजरा को हवा रहित किण्वन प्रक्रिया के माध्यम से संरक्षित करने की एक वैज्ञानिक विधि है, जो लगभग 40 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है। यह चारा पौष्टिक एवं सुपाच्य होने के साथ पशुओं के लिए अत्यंत लाभकारी है तथा इसे तैयार होने के बाद लगभग 2 वर्षों तक सुरक्षित रखकर उपयोग किया जा सकता है।
कार्यक्रम में विकासखण्ड महासमुंद से 9, बागबाहरा से 7, पिथौरा से 4, बसना से 3 तथा सरायपाली से 7 कृषकों ने भाग लेकर सायलेज निर्माण संयंत्रों का अवलोकन किया। इनमें से 16 कृषकों का चयन सायलेज निर्माण हेतु किया गया है, जिन्हें प्रोत्साहन स्वरूप 90 प्रतिशत अनुदान पर सायलेज निर्माण किट उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा कृषकों को पशुपालन प्रबंधन की उन्नत तकनीकों से अवगत कराने हेतु शासकीय पशु प्रजनन केन्द्र, चंदखुरी का भ्रमण कराया गया। इस अवसर पर डॉ. अजय पाण्डेय द्वारा पशुओं के उचित रखरखाव, संतुलित आहार, पशुशाला की स्वच्छता, सुरक्षित दुग्ध दुहन विधि तथा गौवंशीय बछड़ों की देखभाल संबंधी जानकारी दी गई।

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