राजनांदगांव। शहर के मध्य एक मकान में अवैध तरीके से बाटलिंग और रिफलिंग कर मिलावटी शराब बिक्री करने के मामले में पुलिस ने शराब भट्ठी के सुपरवाइजर, सेल्समैन सहित 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मौके से अवैध शराब की बोतल में प्रयुक्त ढक्कन, होलोग्राम और लेबलिंग की सामग्री भी बरामद की है।
मिली जानकारी के मुताबिक खैरागढ़ में राजपूत होटल के बाजू में एक मकान पर कुछ लोगों के अवैध रूप से मिलावटी शराब की बिक्री करने की सूचना पुलिस को मिली। उक्त सूचना पर थाना खैरागढ़ एवं सायबर सेल की संयुक्त टीम बनाकर मौके पर जाकर रेड किया गया, जो राजपूत ढाबा के बगल में एक किराये के मकान में आरोपी भागवत वर्मा और त्रिलोक यादव अवैध रूप से शराब का बॉटलिंग एवं रिफलिंग करते रंगे हाथों पकड़ा गया।
इस कार्रवाई के आधार पर थाना खैरागढ़ में अप.क्र. 194/2026 धारा/ 34(1)क, 34(2), 36, 49(ख)(ग), 59 क(1)(2) आबकारी एक्ट एवं धारा 61(2), 318(4), 336(2), 336(3), 340(2) बीएनएस कायम किया गया। उपरोक्त दोनों आरोपियों से पूछताछ करने पर इनके अन्य 2 साथियों की संलिप्तता भी पाई गई। इस प्रकार कुल 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में भागवत वर्मा 26 वर्ष निवासी ग्राम सनडोंगरी गातापार (सेल्समैन खैरागढ़ शराब भट्ठी), त्रिलोक यादव 29 वर्ष निवासी वार्ड क्र. 3 गैरेजपार कुसुमकसा दल्लीराजहरा बालोद (सेल्समैन खैरागढ़ शराब भट्ठी), शक्ति नारायण सिंह 43 वर्ष निवासी रेस्ट हाउस रोड वार्ड नं. 15 दंतेवाड़ा हाल पता अमन झा का मकान सिविल लाइन खम्हरिया रोड खैरागढ़ और तिपेश कुमार सोनी, 31 साल निवासी डौंडी वार्ड क्र. 2 थाना डौंडी जिला बालोद (सुपरवाईजर जालबांधा शराब भट्ठी) शामिल हैं।
पूछताछ करने पर आरोपियों द्वारा शराब में पानी मिलाकर अवैध रूप से बॉटलिंग एवं रिफलिंग कर बिक्री करना स्वीकार किया गया। आरोपियों के कब्जे से 130 नग गोवा स्पेशल व्हीस्की सील बंद, 10.5 लीटर संदिग्ध तरल पदार्थ, कुल जब्त शराब मात्रा 34 लीटर कीमत 22320 रुपए, 203 नग ढक्कन, 720 नग लेबल स्टीकर, 3 पत्ता होलोग्राम, 01 जेरिकेन, 01 चाड़ी, 12 नग ब्लू स्टिक, 67 नग खाली शराब बोतल, 02 नग खाली वाटर केन एवं अन्य सामग्री जब्त की गई।
पुलिस द्वारा मामले में इस बात का खुलासा नहीं किया गया है कि इस गिरोह द्वारा मिलावटी शराब की पैकिंग करने के बाद उन्हें कहां खपाया जा रहा था। सूत्र बताते हैं कि इस तरह के मिलावटी शराब को शासकीय शराब दुकानों के जरिये ही खपाया जाता है। जब इस तरह की बॉटलिंग में भट्ठी के सुपरवाइजर और सेल्समैन शामिल हों तो स्वाभाविक है कि वे या तो इसे दुकान में खपायेंगे या फिर कोचियों के सुपुर्द करेंगे। कायदे से इसकी जांच होनी चाहिए, मगर विभाग की बदनामी के डर से अफसर इससे बचने की कोशिश करते हैं। पूर्व में भी ऐसे मामले उजागर हो चुके हैं, मगर इस पर कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है।

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