नए मेडिकल कॉलेजों में एनएमसी नियमों पर सवाल, जूनियर डॉक्टर बने एचओडी

नए मेडिकल कॉलेजों में एनएमसी नियमों पर सवाल, जूनियर डॉक्टर बने एचओडी

रायपुर । प्रदेश में शुरू होने वाले नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानकों को दरकिनार कर जांजगीर-चांपा मेडिकल कॉलेज के कई विभागों में एमबीबीएस और जूनियर डॉक्टरों को प्रभारी विभागाध्यक्ष (एचओडी) की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। अगले माह से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होनी है, लेकिन योग्य शिक्षकों की कमी चिंता का विषय बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, जांजगीर-चांपा मेडिकल कॉलेज के 17 विभागों में कई ऐसे डॉक्टरों को प्रभारी बनाया गया है, जो एनएमसी द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के मानकों पर खरे नहीं उतरते। नियमों के मुताबिक किसी अकादमिक विभाग का एचओडी बनने के लिए संबंधित विषय में एमडी/एमएस डिग्री के साथ प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर स्तर का अनुभव होना आवश्यक है।
इस बीच दंतेवाड़ा मेडिकल कॉलेज की स्वशासी समिति के गठन पर भी सवाल उठे हैं। समिति में जनप्रतिनिधियों, फार्मासिस्ट और आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी को शामिल किया गया है, जबकि एक भी एलोपैथी चिकित्सक को स्थान नहीं मिला है।
वहीं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने करीब 60 असिस्टेंट प्रोफेसरों की पदोन्नति प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। वर्ष 2021 बैच के सहायक प्राध्यापकों को एसोसिएट प्रोफेसर बनाया जा सकता है, जिससे नए मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी दूर होने की उम्मीद है।
 जांजगीर-चांपा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. राकेश नहरेल ने कहा कि विभागों के सुचारु संचालन के लिए फिलहाल अस्थायी व्यवस्था की गई है। नियमित और पात्र फैकल्टी की नियुक्ति होते ही एनएमसी मानकों के अनुसार स्थायी एचओडी नियुक्त किए जाएंगे।

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