गौतम हॉस्पिटल का डिलीवरी रूम एक महीने बाद भी नहीं खुला, मरीज हो रहे परेशान

गौतम हॉस्पिटल का डिलीवरी रूम एक महीने बाद भी नहीं खुला, मरीज हो रहे परेशान

कांकेर। जिले के भानुप्रतापपुर स्थित निजी गौतम हॉस्पिटल के डिलीवरी रूम को प्रशासन द्वारा सील किए जाने के एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सील नहीं खोली गई है। ऐसे में अस्पताल में प्रसव के लिए पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों से प्रसव के लिए आने वाले मरीजों को अब दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
बताया जा रहा है कि गौतम हॉस्पिटल में पूर्व में हुई कार्रवाई के बाद अस्पताल के डिलीवरी रूम को प्रशासन द्वारा सील कर दिया गया था। कार्रवाई के बाद से अब तक सील नहीं खुलने के कारण प्रसव संबंधी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। क्षेत्र में निजी स्तर पर प्रसव सुविधा उपलब्ध कराने वाले अस्पतालों में यह अस्पताल भी आस-पास के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के लिए एक प्रमुख विकल्प माना जाता रहा है।
शुक्रवार को भी प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को परेशान होते देखा गया। अचानक प्रसव पीड़ा की स्थिति में मरीजों को दूसरे अस्पतालों में ले जाने की मजबूरी सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि किसी अस्पताल पर कार्रवाई किए जाने के बाद वहां मिलने वाली आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने से आम मरीजों को होने वाली परेशानी को लेकर प्रशासन की क्या वैकल्पिक व्यवस्था है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी निजी अस्पताल के खिलाफ नियमों के उल्लंघन या अन्य किसी मामले में कार्रवाई हुई है, तो प्रशासन को नियमानुसार कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कार्रवाई का खामियाजा आम और गरीब मरीजों को न भुगतना पड़े। खासकर प्रसव जैसी आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गौतम हॉस्पिटल में की गई कार्रवाई और सील किए गए डिलीवरी रूम की वर्तमान स्थिति को लेकर जल्द निर्णय लिया जाए। यदि अस्पताल को खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती तो प्रशासन को क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए प्रसव संबंधी बेहतर वैकल्पिक स्वास्थ्य व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि गर्भवती महिलाओं को अस्पताल-दर-अस्पताल भटकने की नौबत न आए।

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