नवीन विधानसभा भवन को ‘मिनी माता विधानसभा भवन’ नाम देने की माँग, सतनामी समाज के युवाओं ने सौंपा ज्ञापन

नवीन विधानसभा भवन को ‘मिनी माता विधानसभा भवन’ नाम देने की माँग, सतनामी समाज के युवाओं ने सौंपा ज्ञापन


रायपुर : नवीन विधानसभा भवन का नाम ‘मिनी माता विधानसभा भवन’ रखे जाने की माँग को लेकर सतनामी समाज के युवाओं ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को ज्ञापन सौंपा है। समाज के प्रतिनिधियों ने नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव और बिलाईगढ़ विधायक कविता प्राणलहरे से मुलाकात कर आग्रह किया कि पूर्व में स्थापित विधानसभा भवन की तरह ही नवीन विधानसभा भवन का नाम भी ‘मिनी माता विधानसभा भवन’ यथावत रखा जाए।


सतनामी समाज के युवाओं ने कहा कि यह विषय केवल एक समाज का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सामाजिक पहचान, ऐतिहासिक विरासत और सर्वसमाज की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आगामी 14 दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को मजबूती से उठाकर इसे आधिकारिक रूप से तय कराने की माँग की।
इस अवसर पर पुनेश्वर लहरे ने कहा कि मिनी माता जी अविभाजित मध्य प्रदेश की प्रथम दलित महिला सांसद रही हैं और उनका नाम समानता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है, इसलिए विधानसभा में जनता की इस भावनात्मक आवाज को पूरी ताकत से उठाया जाना चाहिए।

सतनामी समाज के युवाओं ने नवीन विधानसभा भवन का नाम ‘मिनी माता विधानसभा भवन’ रखे जाने की माँग को लेकर महत्वपूर्व कदम उठाते हुए कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में सतनामी समाज के प्रबुद्ध प्रतिनिधियों ने नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव और बिलाईगढ़ विधायक कविता प्राणलहरे को शामिल करते हुए उनके माध्यम से एक महत्वपूर्ण अनुरोध किया है। उन्होंने आग्रह किया कि जैसाकि पूर्ववर्ती विधानसभा भवन का नाम ‘मिनी माता विधानसभा भवन’ रखा गया था, ठीक उसी तरह नवीन विधानसभा भवन का नाम भी इसी नाम से सम्मानित किया जाए।

इसके साथ ही, उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा के भीतर सशक्त रूप से उठाने का अनुरोध भी किया है, ताकि इसे एक आधिकारिक रूप से स्वीकृत नामकरण में बदलने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें। सतनामी समाज के युवा प्रतिनिधियों ने इस ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट किया कि यह विषय केवल एक समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक रूप से छत्तीसगढ़ की सामाजिक पहचान, ऐतिहासिक विरासत और विभिन्न समाजों की भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।



यह ज्ञापन आगामी 14 दिसंबर से प्रारंभ होने वाले विधानसभा सत्र में इस महत्वपूर्ण विषय को मजबूती से उठाने के आग्रह के साथ प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर उपस्थित पुनेश्वर लहरे ने बताया कि मिनी माता जी अविभाजित मध्य प्रदेश की पहली दलित महिला सांसद रह चुकी हैं, और उनका नाम समानता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। इसलिए, यह आवश्यक है कि विधानसभा में जनता की इस भावनात्मक आवाज को पूरी ताकत के साथ उठाया जाए, ताकि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया जा सके और उचित कदम उठाए जा सकें।

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