रायपुर-दुर्ग-बिलासपुर तक फैला ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क उजागर, 95 लाख की जब्ती

रायपुर-दुर्ग-बिलासपुर तक फैला ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क उजागर, 95 लाख की जब्ती

रायपुर। टी-20 वर्ल्ड कप से पहले रायपुर क्राइम एंड साइबर यूनिट की टीम ने महादेव ऐप की तर्ज पर बुक बनाकर प्रदेशवासियों को सट्‌टा खिलाने वाले नए सिंडिकेट का खुलासा किया है। ये आरोपी ‘jmdbet777.com’-’Classic777.com’ ऐप पर दांव लगवाते और लोगों को सट्‌टा खिलाते थे। इन ऐप में 40 से ज्यादा गेम्स हैं। रायपुर पुलिस ने 31 जनवरी को ‘jmdbet777.com’-’Classic777.com’ बुक से सट्‌टा खिलाने के आरोप में दुर्ग निवासी रखब देव पाहुजा, रायपुर के रहने वाले पीयूष जैन, जितेन्द्र कुमार कृपलानी उर्फ जित्तू, कमल राघवानी, सचिन जैन और बिलासपुर निवासी दीपक अग्रवाल को पकड़ा है। इन आरोपियों से पुलिसकर्मियों ने 37 लाख 50 हजार रुपए कैश, 10 मोबाइल, 3 कार जब्त की है। आरोपियों से जब्त राशि और सामान की कीमत 95 लाख रुपए बताई जा रही है। सट्‌टा खिलाने वाले आरोपियों के सिंडिकेट में दुर्ग निवासी रवि सोनकर, रायपुर निवासी नितिन मोटवानी, नागपुर का रहने वाला अंकित भी शामिल है। फरार आरोपियों की तलाश में एसीसीयू की टीम जुटी हुई है। रवि सोनकर, नितिन मोटवानी और अंकित सिंडिकेट को आईडी प्रोवाइड करवाते थे, जबकि रखब देव पाहुजा और पीयूष जैन मास्टर आईडी होल्डर के साथ-साथ आईडी डिस्ट्रीब्यूटर की भूमिका में थे। वहीं, जितेंद्र कृपलानी, सचिन जैन, कमल राघवानी और दीपक अग्रवाल लोकल स्तर पर आईडी डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में काम कर रहे थे। 31 जनवरी को एसीसीयू की टीम को सूचना मिली, कि थाना गंज क्षेत्र इलाके में स्थित नागोराव गली अंडर ब्रिज के पास चारपहिया वाहनों में सवार कुछ लोग ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एसीसीयू की टीम ने मुखबिर के बताए ठिकाने पर दबिश दी। तीन अलग-अलग चारपहिया वाहनों में 6 व्यक्तियों को पकड़ा। पूछताछ में आरोपियों ने अपनी पहचान बताई और कार में बैठे होने की बात कही। संदेह के आधार पर पुलिस ने युवकों के मोबाइल की जांच की तो उनके फोन पर ऑनलाइन बैटिंग ऐप के माध्यम से सट्‌टा खिलाने का सेटअप दिखा। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने सट्‌टा खिलाने की बात स्वीकारी, तो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
आईटी अफसरों को जांच में शामिल करेगी पुलिस
पुलिस उपायुक्त स्मृतिक राजनाला ने दैनिक भास्कर को बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनके अकाउंट्स की जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में कैश मिला और अकाउंट्स में करोड़ों के ट्रांजैक्शन हैं। आईटी अफसरों को केस की जांच में शामिल किया जाएगा। आरोपियों के पास से म्यूल अकाउंटस की जानकारी मिली है। म्यूल अकाउंट्स किसके हैं? इसके बारे में भी पता लगाया जा रहा है।

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