रायपुर। पीएमश्री स्कूल पीएम नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। छत्तीसगढ़ में उनके गरियाबंद के पीएमश्री स्कूल में अराजकता का ये आलम है कि महिला शिक्षिकाओं ने स्कूल को फैशन परेड और रील्स बनाने का अड्डा बना लिया है। गरियाबंद कलेक्टर बीएस उइके ने NPG.NEWS की खबर को संज्ञान में लेते हुए डीईओ से रिपोर्ट मांगी है। अराजकता और अव्यवस्था को लेकर नाराज कलेक्टर ने डीईओ को फटकार लगाई है। अचरज की बात ये कि कैटवाक करते रील्स बनाने वालों में उप प्राचार्या भी शामिल थीं। जिम्मदार अधिकारी ही जब अनुशासनहीनता पर उतर आए तब सहज की अंदाज लगाया जा सकता है कि स्कूल कैम्पस के भीतर अध्ययन अध्यापन की क्या व्यवस्था होगी। कलेक्टर ने डीईओ को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कलेक्टर ने बताया कि वीडियो और रील्स में दिखाई दे रही शिक्षिकाओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगने का निर्देश डीईओ को दिया है।
डीईओ की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि गरियाबंद के पीएमश्री स्कूल की शिक्षिकाओं का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर तेजी के साथ वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में जो कुछ दिख रहा है, शिक्षकीय कार्य और शिक्षक की गरिमा के विपरीत है। क्लास रूम में बच्चों को पढ़ाई कराने के बजाय शिक्षिकाएं ग्रुप फोटो,ग्रुप वीडियो में व्यस्त नजर आ रही है। स्कूल में अनुशासनहीनता इस कदर हावी है कि टीचर और स्टाफ प्रिंसिपल की बात ही नहीं मान रही हैं। अचरज की बात ये कि यह सब कलेक्टर और डीईओ की नाच के नीचे हो रहा है। अराजकता का आलम ये कि वीडियो और रील्स तो बनाए जा रहे हैं,साथ ही शिक्षक लामबंदी पर भी उतर आए हैं। अध्ययन अध्यापन को छोड़कर शिक्षक और कर्मचारी विरोध प्रदर्शन पर उतर आए हैं।
पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत चलाए जा रहे पीएमश्री स्कूल को फैशन परेड और विवाद का अड्डा बना दिया गया है। आला अधिकारी हैं कि स्कूल और यहां पढ़ने वाले बच्चों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। अनुशासनहीन शिक्षकों और स्टाफ के चलते पीएमश्री स्कूल में पढ़ाई करने वाले बच्चों का भविष्य ही दांव पर लग गया है। बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने और पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई कराने के बाद शिक्षक खुद ही अनुशासनहीन नजर आ रहे हैं।
जिस समय क्लास रूम में बच्चों की पढ़ाई में शिक्षकों को व्यस्त रहना है, उस समय कैम्पस में फोटो सेशन कराने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अनुशासनहीन शिक्षकों और स्टाफ के बारे में प्रिंसिपल द्वारा लगातार आला अफसरों को शिकायत की जा रही है। पीएमश्री स्कूल गरियाबंद में जो कुछ हो रहा है,उसकी पूरी जानकारी डीईओ गरियाबंद को भी है। पूरा मामला उनके संज्ञान में है। शिक्षकों की अनुशासनहीनता और गैर शिक्षकीय कार्य में व्यस्तता की जानकारी के बाद भी आजतलक किसी भी प्रकार की कार्रवाई ना होना भी अचरज की बात है।
सिविल सेवा नियम का उल्लंघन का है मामला
शासकीय सेवकों के लिए बनाए गए नियमों व मापदंडों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ में यदि कोई शासकीय शिक्षक शाला परिसर या स्कूल समय के दौरान इंस्टाग्राम रील बनाता है, तो यह मुख्य रूप से ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965’ का सीधा उल्लंघन माना जाता है।
ये है स्कूल शिक्षा विभाग के नियम
छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में समय-समय पर कड़े निर्देश जारी किए हैं। यहां उन नियमों और धाराओं का विवरण दिया गया है जो इस स्थिति में लागू होती है:
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 यह शिक्षकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण नियम है। इसके तहत निम्नलिखित धाराओं का उल्लंघन होता है:
नियम 3 (Rule 3): इसमें स्पष्ट है कि हर शासकीय सेवक को पूर्ण निष्ठा (Integrity) बनाए रखनी होगी और ऐसा कोई कार्य नहीं करना होगा जो शासकीय सेवक के लिए अशोभनीय (unbecoming) हो। रील बनाना “अशोभनीय कृत्य” की श्रेणी में आता है।
नियम 7 (Rule 7): यह सरकारी कर्मचारी द्वारा सोशल मीडिया और मीडिया के दुरुपयोग से संबंधित है।
छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग के विशिष्ट निर्देश
छत्तीसगढ़ लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि
मोबाइल प्रतिबंधः शिक्षण कार्य के दौरान मोबाइल का उपयोग केवल शैक्षणिक कार्यों के लिए ही किया जा सकता है। मनोरंजन या रील बनाने के लिए मोबाइल का उपयोग ‘कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही’ माना जाता है।
अनुशासनहीनताः स्कूल परिसर में फिल्मी गानों पर डांस या एक्टिंग करना स्कूल के शैक्षणिक वातावरण को दूषित करने और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
कानूनी और विभागीय परिणाम- यदि कोई शिक्षक ऐसा करते हुए पाया जाता है, तो छत्तीसगढ़ में निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती है:
दंड का प्रकार
निलंबन:छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत शिक्षक को तत्काल निलंबित किया जा सकता है।
अनुशासनात्मक -कार्रवाई शिक्षक के विरुद्ध विभागीय जांच (Departmental Enquiry) बैठाई जा सकती है।
सेवा पुस्तिका (Service Book) में प्रविष्टि
भविष्य में पदोन्नति (Promotion) और वेतन वृद्धि (Increment) पर रोक लग सकती है।

