रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन वर्तमान में अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रहा है, जिसके कारण IAS के 29 और IPS के 19 महत्वपूर्ण पद रिक्त पड़े हैं। राज्य के 21 वरिष्ठ आईएएस अधिकारी वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं, जिससे मंत्रालय से लेकर जिलों तक कामकाज का अतिरिक्त बोझ बढ़ा है।
अफसरों की इस कमी के कारण छत्तीसगढ़ में विकास योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन की गति धीमी हो रही है। कई वरिष्ठ अधिकारियों को एक साथ कई विभागों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है, जिससे आम जनता के प्रशासनिक कार्यों में देरी होने की संभावना है।
प्रशासनिक ढांचे की वर्तमान स्थिति
छत्तीसगढ़ में IAS के कुल 202 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 173 अफसर ही तैनात हैं। इसी तरह, IPS के 153 पदों के मुकाबले केवल 134 अधिकारी ही कार्यरत हैं। राज्य की प्रशासनिक रीढ़ कहे जाने वाले IFS कैडर में भी 35 पद खाली हैं।
कमी का एक बड़ा कारण यह है कि 21 आईएएस अधिकारी केंद्र सरकार में नीति निर्माण, आंतरिक सुरक्षा और निवेश जैसे अहम क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। इनमें अमित अग्रवाल, निधि छिब्बर, डॉ. प्रियंका शुक्ला और एस हरीश जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं।
चुनाव ड्यूटी से बढ़ेगी मुश्किलें
संकट तब और गहराने वाला है जब आगामी पांच राज्यों (बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुदुचेरी) के विधानसभा चुनावों के लिए छत्तीसगढ़ से 30 और अधिकारियों को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा जाएगा। केंद्रीय चुनाव आयोग ने 25 आईएएस और 5 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को इस जिम्मेदारी के लिए नियुक्त किया है। इनमें ऋतु सैन, सिद्धार्थ कोमल परदेशी, अंकित आनंद और अवनीश शरण जैसे नाम शामिल हैं।
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के नियम
अफसरों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति आमतौर पर 5 वर्ष की होती है, जिसे विशेष परिस्थितियों में 7 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। ज्वाइंट सेक्रेटरी या एडिशनल सेक्रेटरी जैसे उच्च पदों पर अनुभव प्राप्त करने के लिए अधिकारी केंद्र का रुख करते हैं।
फैक्ट्स
IAS रिक्ति: स्वीकृत 202, कार्यरत 173, रिक्त 29
IPS रिक्ति: स्वीकृत 153, कार्यरत 134, रिक्त 19
IFS रिक्ति: स्वीकृत 153, कार्यरत 118, रिक्त 35
दिल्ली में तैनात: छत्तीसगढ़ कैडर के 21 आईएएस अधिकारी वर्तमान में केंद्र में हैं
चुनाव ड्यूटी: 30 अफसर चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में अन्य राज्यों में जाएंगे
इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों के बाहर रहने से राज्य सरकार को विभागों के बंटवारे में फेरबदल करना पड़ सकता है। ऐसे में संभावना है कि आगामी हफ्तों में कई जूनियर अफसरों को बड़े विभागों की कमान सौंपी जा सकती है।

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