15 दिनों में 15 उद्योगों पर ताला, 9.22 लाख की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति

15 दिनों में 15 उद्योगों पर ताला, 9.22 लाख की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति

रायपुर। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने बीते पखवाड़े में पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों पर बड़ी कार्रवाई की है। 10 से 25 फरवरी के बीच किए गए नियमित और आकस्मिक निरीक्षणों में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर 15 उद्योगों के उत्पादन पर रोक लगाते हुए उनका विद्युत विच्छेदन किया गया।
मंडल ने इस अवधि में 3 उद्योगों पर कुल 9.22 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी अधिरोपित की है।
स्पंज आयरन उद्योग पर कार्रवाई
ग्राम चरौदा, रायपुर स्थित मेसर्स पुष्प स्टील्स एंड माइनिंग प्रा. लिमिटेड (पूर्व में इंडियन स्टील एंड पावर प्रा. लिमिटेड) में वायु प्रदूषण पाए जाने पर वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 31(क) के तहत उत्पादन बंद एवं विद्युत विच्छेदन के आदेश जारी किए गए।
मेटल पार्क रावांभाठा में 11 इकाइयों पर शिकंजा
मेटल पार्क, रावांभाठा क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान 9 स्लैग क्रशर, 1 बाइंडिंग वायर इकाई और 1 स्टील फर्नीचर इकाई बिना वैध सम्मति एवं प्रदूषण नियंत्रण उपायों के संचालित पाई गईं। इन सभी 11 इकाइयों के विरुद्ध वायु अधिनियम 1981 की धारा 31(क) और जल अधिनियम 1974 की धारा 33(क) के तहत उत्पादन बंद एवं बिजली काटने की कार्रवाई की गई।
सिलतरा और उरला में भी कार्रवाई
सिलतरा स्थित एसकेए इस्पात प्रा. लिमिटेड (पूर्व नाम- जोरावर इंजीनियरिंग एंड फाउंड्री फोर्ज प्रा. लिमिटेड) में वायु प्रदूषण पाए जाने पर 19 फरवरी 2026 को उत्पादन बंद करने के आदेश जारी हुए। इसी तरह उरला-गोंदवारा स्थित छत्तीसगढ़ फेरो ट्रेडर्स प्रा. लिमिटेड में भी वायु प्रदूषण की पुष्टि होने पर संचालन पर रोक लगा दी गई।
नियमों के पालन तक नहीं मिलेगी अनुमति
मंडल ने स्पष्ट किया है कि जब तक संबंधित उद्योग पर्यावरणीय मानकों, वैधानिक प्रावधानों और सम्मति शर्तों का पूर्ण पालन सुनिश्चित नहीं करेंगे, तब तक उन्हें संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा औद्योगिक क्षेत्रों में निरीक्षण अभियान लगातार जारी रहेगा और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर वायु एवं जल अधिनियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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