कृषि क्रांति एक्सपो में उमड़ा किसानों का सैलाब, 17 कंपनियों ने दिखाई रुचि

कृषि क्रांति एक्सपो में उमड़ा किसानों का सैलाब, 17 कंपनियों ने दिखाई रुचि

जशपुरनगर। जिला प्रशासन जशपुर द्वारा कुनकुरी में आयोजित कृषि क्रांति एक्सपो में किसानों का उत्साह चरम पर दिखाई दे रहा है। एक्सपो के अंतर्गत आयोजित डेमॉन्स्ट्रेशन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित होकर सक्रिय रूप से भागीदारी सुनिश्चित की। एक्सपो में विभिन्न कृषि उत्पादों, आधुनिक तकनीकों एवं स्थानीय उत्पादों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई, जिसने किसानों और आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए 17 कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, वहीं जिले के 40 लीडर किसानों ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए कंपनियों के साथ सीधे संवाद स्थापित किया।
कंपनियों ने दिखाई गहरी रुचि  :
एक्सपो में विभिन्न कंपनियों ने जशपुर जिले के कृषि उत्पादों में विशेष रुचि दिखाई। महाराष्ट्र से आई एक कंपनी ने जिले के ऑर्गेनिक उत्पादों को लेकर उत्साह जताया, जबकि पटना (बिहार) से आए शुभम बर्नवाल ने मिलेट, कटहल एवं सरसों आधारित उत्पादों की खरीद में रुचि दिखाई। भोपाल से आए कंपनी प्रतिनिधि अर्पण गौर ने जिले के मिलेट उत्पादों के नमूने लिए और लगभग 200 टन मिलेट क्रय करने की प्राथमिकता जताई, जिससे मिलेट उत्पादन को बड़ा बाजार मिलने की संभावना बनी है।
औषधीय एवं वैकल्पिक फसलों की बढ़ी मांग :
रांची से आए प्रतिनिधियों ने जिले के हाथी प्रभावित क्षेत्रों में लेमन ग्रास एवं पचौली की कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को लेकर किसानों से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि पचौली फसल को जंगली जानवर नुकसान नहीं पहुंचाते और इसे अन्य फसलों के साथ इंटरक्रॉपिंग के रूप में भी उगाया जा सकता है। इस संबंध में आशुतोष ने जानकारी दी कि पचौली की फसल एक बार लगाने के बाद लगभग 5 वर्षों तक उत्पादन देती है, जिससे किसानों को स्थायी आय का स्रोत मिलता है। वहीं पीपरेता (मेन्था की उन्नत किस्म) की खेती से किसान एक वर्ष में लगभग 1 लाख रुपए तक की आय अर्जित कर सकते हैं। यह फसल कम लागत में उगाई जा सकती है और इसमें जंगली जानवरों से नुकसान का खतरा भी कम रहता है।
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और निर्यात की संभावनाएं  :
ग्लोबल हर्ब्स कंपनी की प्रतिनिधि रजनी गाबा ने जिले के गिलोय, आंवला, हल्दी, सफेद मूसली, जामुन गुठली जैसे औषधीय उत्पादों की मांग जताई। उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत से इन उत्पादों का निर्यात महंगा पड़ता है, इसलिए जशपुर से आपूर्ति की संभावना अत्यंत लाभकारी है। इसके अलावा कुसुम बीज, लाख, पीपल, नागरमोथा, करंज बीज और साल बीज की भी मांग व्यक्त की गई। इसी क्रम में राइस एक्सपोर्टर जय प्रकाश शर्मा ने बताया कि वे जिले से आईआर-64 एवं स्वर्णा जैसी धान किस्मों का निर्यात करना चाहते हैं। इसके लिए चावल के नमूनों का प्रयोगशाला परीक्षण कराया जाएगा और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरने वाले उत्पादों का निर्यात किया जाएगा।
किसानों के लिए नए अवसरों का मंच  : 
कृषि क्रांति एक्सपो के माध्यम से जिले के किसानों को सीधे बाजार से जुड़ने, उत्पादों के मूल्य संवर्धन और आय वृद्धि के नए अवसर मिल रहे हैं। यह आयोजन न केवल किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ रहा है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने का मंच भी प्रदान कर रहा है। जिला प्रशासन जशपुर द्वारा आयोजित यह एक्सपो किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो रहा है और भविष्य में कृषि आधारित आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में उभर रहा है।

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