बिलासपुर। स्कूल शिक्षा विभाग में जो ना हो कम ही है, बिलासपुर के प्रभारी डीईओ विजय तांडे की जगह बमुश्किल छह महीने लेक्चरर एलबी से प्राचार्य के पद पर पदोन्नत होने वाले रामेश्वर जायसवाल को बिलासपुर जिले का प्रभारी डीईओ बना दिया है। स्कूल विभाग के आदेश के बाद अब सीनियर प्राचार्यों का गुस्सा फूट पड़ा है। प्राचार्य कल्याण संघ ने राज्यपाल को पत्र लिखकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
राज्यपाल को लिखे पत्र में प्राचार्य कल्याण संघ ने विरोध दर्ज कराने के साथ ही नियम विरुद्ध की गई इस तरह की नियुक्ति पर हस्तक्षेप की मांग की है। राज्यापाल को लिखे पत्र में प्राचार्य कल्याण संघ ने साफ कहा है, 6 माह की वरिष्ठता रखने वाले प्राचार्य शा.उ.मा.विधालय जेवरा, वि.ख मस्तूरी, जिला बिलासपुर को बिलासपुर जिले का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है।
यह आदेश छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र 14. जुलाई .2014 एवं उसके पूर्व के सर्कुलर के अनुसार वरिष्ठता के आधार पर ही प्रभार दिए जाने का पूर्णतः उल्लंघन है। संघ ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा है, हाई कोर्ट ने अपने फैसले से इस प्रकार के आदेश को अमान्य किया है।
प्राचार्य कल्याण संघ ने अपने पत्र में लिखा है, बिलासपुर जिले के इतिहास का यह ऐसा पहला मामला है जहां 14 से 18 वर्ष के वरिष्ठता रखने वाले प्राचार्य को नजर अंदाज कर और नियमों को ताक पर रखकर मात्र 6 माह के कनिष्ठ प्राचार्य रामेश्वर जायसवाल को संवेदनशील एवं बड़े जिले का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है। विभाग की इस कार्यप्रणाली से वरिष्ठ प्राचार्यों में नाराजगी एवं असंतोष व्याप्त है।
स्कूल शिक्षा विभाग के इस विवादित आदेश के बाद छत्तीसगढ़ बिलासपुर जिले के वरिष्ठ प्राचार्यों के अलावा प्राचार्य कल्याण संघ के पदाधिकारियों का गुस्सा फूटने लगा है। संघ से जुड़े पदाधिकारी अब न्यायालयीन विकल्प को लेकर चर्चा भी करने लगे हैं। मामला हाई कोर्ट पहुंच जाए तो अचरज की बात नहीं होनी चाहिए।

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