कुथरेल में भारी मात्रा में कथित रूप से सितार गुटखा बनाए जाने के मामले में पुलिस और खाद्य विभाग की कार्रवाई के बाद नए खुलासे सामने आने का दावा किया जा रहा है। फैक्ट्री को सील कर वीरेंद्र तिवारी से पूछताछ की गई, जिसमें कई तथ्य सामने आए हैं। आरोप है कि वीरेंद्र तिवारी केवल एक मोहरे के रूप में कार्य कर रहा था, जबकि पूरे गुटखा माफिया नेटवर्क का संचालन जगदीश शदाणी द्वारा किया जा रहा है।
मामले से जुड़े आरोपों के अनुसार, जगदीश शदाणी दुर्ग, राजनांदगांव और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर गुटखा निर्माण का काम कर रहा है। दावा किया गया है कि आसपास के शहरों में उसके 5 से 6 ठिकानों पर गुटखा बनाने का कार्य संचालित किया जा रहा है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि वीरेंद्र तिवारी और उसके स्टाफ से मिली जानकारी के आधार पर इन ठिकानों पर भी छापेमारी की जानी चाहिए।
आरोप यह भी है कि पूर्व में जगदीश शदाणी अपने स्टाफ और अन्य लोगों के नाम से गुटखा फैक्ट्री संचालित कर कार्रवाई से बचता रहा है और इसी तरीके से पूरे शहर में अपना कारोबार चला रहा है। उसके स्टाफ दीपक पांडे, वसीम खान और मनसुख साहू, जो राजनांदगांव के निवासी बताए गए हैं, को कथित तौर पर मामले से बाहर रखकर संरक्षण दिए जाने का आरोप लगाया गया है, ताकि जगदीश शदाणी के अन्य ठिकानों का पता न लगाया जा सके और उसका नेटवर्क बिना किसी बाधा के चलता रहे।
बताया गया है कि कुथरेल स्थित गुटखा फैक्ट्री में कार्रवाई के बाद से जगदीश शदाणी फरार है। आरोपों के अनुसार, कपड़ा दुकान की आड़ में उसके अन्य अवैध कारोबार भी संचालित हो रहे हैं। यह भी दावा किया गया है कि वह पूर्व में नशीली दवाइयों की बिक्री से जुड़े एक मामले में जेल जा चुका है।
आरोप लगाने वालों ने कहा है कि जगदीश शदाणी एक आदतन अपराधी है, जिसे पुलिस और जीएसटी विभाग द्वारा कार्रवाई से बचाया जा रहा है। वहीं, मनसुख साहू पर राजनांदगांव शहर में खुलेआम सितार गुटखे की मार्केटिंग और बिक्री करने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि खाद्य विभाग और प्रशासन की ओर से इस संबंध में किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
फिलहाल मामले में संबंधित विभागों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सभी आरोप जांच और आधिकारिक पुष्टि के अधीन हैं।

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