लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर स्थित डीडीयू ऑडिटोरियम में आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह में शामिल हुए। गरिमामयी समारोह में उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष पर आधारित स्मारिका “आपातकाल के योद्धा” का विमोचन किया तथा आपातकाल पर आधारित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री इंद्रेश कुमार ने अपने संबोधन में लोकतंत्र, राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि एक जीवन मूल्य है, जिसे समझने और निभाने की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है। उन्होंने आपातकाल के दौर को याद करते हुए कहा कि यह समय भारतीय लोकतंत्र के लिए एक कठिन परीक्षा का काल था, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ा। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को स्मरण करते हुए कहा कि उन लोगों ने जेल, यातनाओं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोकतांत्रिक आदर्शों को जीवित रखा।
मुख्य वक्ता श्री कुमार ने कहा कि इतिहास को याद रखना केवल अतीत को जानना नहीं है, बल्कि उससे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश की एकता, अनुशासन और सामाजिक समरसता को मजबूत करें तथा नशामुक्त और स्वच्छ समाज के निर्माण में योगदान दें। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों ने हमेशा समाज को जोड़ने का कार्य किया है और इन्हीं मूल्यों के आधार पर देश – दुनिया में अपनी पहचान को और मजबूत कर सकता है। उन्होंने युवाओं से “राष्ट्र प्रथम” की भावना को जीवन में अपनाने की अपील करते हुए कहा कि राष्ट्र, ज्ञान और धर्म प्रथम की भावना ही भारत की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने आगे कहा कि अयोध्या सृष्टि का वह स्थान है जो सदैव पूजनीय रहेगा और सत्य व धर्म के मार्ग पर चलते हुए हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना होगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह कालखंड है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष, त्याग और जेल जीवन की कठिनाइयों को याद करते हुए कहा कि इन लोगों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया। श्री साय ने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल स्मरण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को सचेत करना है ताकि वे समझ सकें कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र कितनी बड़ी कुर्बानियों के बाद प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती हमेशा से संघर्ष, संस्कृति और परंपरा की भूमि रही है, जहां लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी आस्था रही है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को इतिहास से अवगत कराने के लिए इस विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करना प्रशंसनीय पहल है।                         मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने पारिवारिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में अनेक परिवारों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने कहा कि मेरे बड़े पिताजी स्वर्गीय श्री नरहरि साय 19 महीनों तक जेल में रहे और इन परिवारों की पीड़ा को करीब से देखा है। उस दौर में जब घर के मुखिया को जेल में डाल दिया जाता था, तब लोकतंत्र सेनानियों के परिवार पर जीवन निर्वाह का संकट आ गया था। श्री साय ने कहा कि इस कठिन समय में स्वयंसेवक भेष बदलकर लोकतंत्र सेनानियों के परिवार को अनाज पहुंचाने का काम करते थे ताकि कोई भूखा न रहे। उन्होंने उस दौर से जुड़ी कई और स्मृतियां भी साझा की और सभी लोकतंत्र सेनानियों का पुण्य स्मरण किया।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कहा कि 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती था। उन्होंने प्रेस सेंसरशिप, मौलिक अधिकारों के निलंबन और संविधान संशोधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समय लोकतंत्र की मजबूती और जागरूकता का प्रतीक बनकर सामने आया। आपातकाल हमें लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सदैव सजग रहने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री श्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकतंत्र सेनानी संघ श्री कैलाश सोनी, विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्रीमती गोमती साय, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, सीजीएमएससी के चेयरमैन श्री दीपक म्हस्के, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, महामण्डलेश्वर श्री अजय रामदास, श्री अखिलेश सोनी, लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री दिवाकर तिवारी, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री सच्चिदानंद उपासने समेत अनेक प्रबुद्धजन तथा लोकतंत्र सेनानी और उनके परिजन मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में प्रदेशभर से 540 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यालय स्तर पर “आपातकाल कभी विस्मृत न हो” विषय पर आयोजित प्रतियोगिता में जे.आर. दानी गर्ल्स स्कूल, रायपुर की जागृति जांगड़े ने प्रथम स्थान प्राप्त किया और उन्हें 31 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। विवेकानंद विद्यापीठ, कोरबा के श्री सूरज तांडिया को द्वितीय तथा अग्रसेन इंटरनेशनल स्कूल, दुर्ग के श्री अंश देशमुख तृतीय स्थान पर रहे। वहीं महाविद्यालय स्तर पर “25 जून : संविधान हत्या दिवस” विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में रायपुर की सुश्री कल्याणी पटले प्रथम, रायगढ़ की सीमा साव द्वितीय तथा दुर्ग की सुश्री खुशबू तृतीय स्थान पर रहीं। मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को स्मृति चिन्ह एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान करते हुए लोकतंत्र और संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में युवाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।

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