युक्तियुक्तिकरण आदेश की अवहेलना पर बड़ा एक्शन, 273 शिक्षकों की सैलरी रुकी

युक्तियुक्तिकरण आदेश की अवहेलना पर बड़ा एक्शन, 273 शिक्षकों की सैलरी रुकी

रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग की महत्वाकांक्षी युक्तियुक्तिकरण योजना का पालन नहीं करने वाले शिक्षकों और अधिकारियों पर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने सख्त रुख अपनाया है। युक्तियुक्तिकरण के तहत जारी पदस्थापना आदेश के बावजूद नई पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले प्रदेशभर के 273 शिक्षकों की सैलरी रोक दी गई है। इसके साथ ही 5 संयुक्त संचालकों (JD) और 33 जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
डीपीआई ने स्पष्ट किया है कि युक्तियुक्तिकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिन शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में पदस्थापना दी गई थी, उनमें से कई अब तक नए विद्यालयों में ज्वाइन नहीं हुए हैं। इसे शासन के आदेशों की अवहेलना मानते हुए कार्रवाई की गई है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों से पूछा है कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद ऐसे शिक्षकों के खिलाफ अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
तीन दिन में मांगा जवाब
डीपीआई ने नोटिस जारी करते हुए संबंधित जेडी और डीईओ को तीन दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। नोटिस में कहा गया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो राज्य शासन के निर्देशों की अवहेलना के आरोप में उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
संचालनालय ने अधिकारियों से उन शिक्षकों के विरुद्ध अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत प्रतिवेदन, प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई, आरोप पत्र, साक्ष्य और संबंधित अभिलेख भी मांगे हैं, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
किन-किन शिक्षकों की सैलरी रोकी गई
डीपीआई के अनुसार पदस्थापना आदेश का पालन नहीं करने वालों में विभिन्न संवर्गों के शिक्षक शामिल हैं। इनमें:
134 प्राथमिक शिक्षक
71 व्याख्याता (लेक्चरर)
42 शिक्षक वर्ग-2
15 प्रधान पाठक (हेड मास्टर)
1 प्राचार्य
शामिल हैं। विभाग का कहना है कि ऐसे शिक्षकों की संख्या 273 से भी अधिक हो सकती है और सूची का लगातार परीक्षण किया जा रहा है।
युक्तियुक्तिकरण के तहत हुआ था बड़ा समायोजन
गौरतलब है कि स्कूल शिक्षा विभाग ने हाल ही में राज्य के 10,538 विद्यालयों का युक्तियुक्तिकरण करते हुए 16,165 शिक्षकों का समायोजन किया था। इस प्रक्रिया का उद्देश्य शिक्षकों की उपलब्धता को संतुलित करना और जरूरत वाले विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करना था।
डीपीआई की इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पदस्थापना आदेशों की अनदेखी करने वाले शिक्षकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर और कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

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