एनएमडीसी द्वारा 17 गांवों में आयोजित ग्रीष्मकालीन शिविर 15 जून तक चलेंगे

एनएमडीसी द्वारा 17 गांवों में आयोजित ग्रीष्मकालीन शिविर 15 जून तक चलेंगे

दंतेवाड़ा। जिले के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों को खेल, विज्ञान, कला और संगीत से जोडऩे के उद्देश्य से एनएमडीसी की तरफ से 17 गांवों में ग्रीष्मकालीन शिविर आयोजित किया गया है। इसी कड़ी में आयोजित ये ग्रीष्मकालीन शिविर 15 जून तक चलेंगे। इस दौरान विभिन्न प्रतियोगिताएं और सामूहिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी, जिनमें बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। शिविरों में बड़ी संख्या में बच्चे भाग ले रहे हैं, जहां उन्हें फ्रिसबी, आर्ट-क्राफ्ट, संगीत और विज्ञान आधारित गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, टीम भावना और नई चीजें सीखने की रुचि विकसित हो रही है।
बैलाडीला क्षेत्र के चोलनार, समलवार, हिरोली, बड़े बचेली, दुगेली, गंजेनार, मसेनार, मोलसनार, नेरली, बड़े कमेली, धुरली, गामावाड़ा, पोरोकमेली, भांसी, बासनपुर और झिरका सहित 17 गांवों में आयोजित शिविरों में चार प्रमुख गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इनमें फ्रिसबी खेल, ड्राइंग-आर्ट-क्राफ्ट, संगीत, साइंस डीआईवाई-इनोवेशन शामिल हैं। बच्चों को विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की देखरेख में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिविरों में फ्रिसबी खेल बच्चों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। खेल के दौरान उन्हें टीम के साथ काम करना, नेतृत्व क्षमता विकसित करना और अनुशासन का महत्व समझाया जा रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान खेल की तकनीकों के साथ समूह गतिविधियां और मैत्री मैच भी कराए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे उत्साह के साथ भाग लेते हुए अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। ड्राइंग-आर्ट-क्राफ्ट गतिविधियों में बच्चों को चित्रकला, पेपर क्राफ्ट और मॉडल निर्माण सिखाया जा रहा है। अलग-अलग रचनात्मक गतिविधियों के जरिए उन्हें दैनिक जीवन की चुनौतियों के सरल समाधान समझाए जा रहे हैं। बच्चों ने प्रकृति, पर्यावरण, स्वच्छता और शिक्षा जैसे विषयों पर चित्र बनाए हैं। कई बच्चों ने स्थानीय जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली को भी अपनी कला में स्थान दिया है। साथ ही उपयोगी वस्तुओं के निर्माण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी जानकारी भी दी जा रही है।
शिविरों में बच्चों को नृत्य, गायन और गिटार जैसे वाद्य यंत्रों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कई गांवों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की तैयारी भी चल रही है। इन गतिविधियों के जरिए बच्चों को अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है। स्थानीय लोक संस्कृति और पारंपरिक संगीत से परिचित कराने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। साइंस डीआईवाई-इनोवेशन कार्यक्रम के तहत बच्चों को सरल वैज्ञानिक प्रयोगों और मॉडल निर्माण के माध्यम से विज्ञान की अवधारणाएं समझाई जा रही हैं। कम लागत वाली सामग्रियों से मॉडल बनाकर बच्चे विज्ञान के व्यावहारिक उपयोग को जान रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच और जिज्ञासा को बढ़ावा देना है।

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