सामान गुम होने पर इंडिगो को 1.82 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश

सामान गुम होने पर इंडिगो को 1.82 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश

रायपुर । जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने यात्री का सामान गुम होने के मामले में इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो) को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराया है। आयोग ने एयरलाइन को कुल 1.82 लाख रुपये का हर्जाना अदा करने का आदेश दिया है।
मामला समता कॉलोनी, रायपुर निवासी 28 वर्षीय आशुतोष जाखोदिया से जुड़ा है। उन्होंने आयोग में परिवाद दायर कर बताया था कि 4 दिसंबर 2015 को आगरा में विवाह समारोह में शामिल होने के बाद वे 5 दिसंबर को दिल्ली से रायपुर लौट रहे थे। दिल्ली एयरपोर्ट पर इंडिगो के कर्मचारियों ने समय की कमी और सप्ताहांत की भीड़ का हवाला देते हुए उनसे तीन बैग फ्लाइट में नहीं ले जाने का अनुरोध किया था। कर्मचारियों ने भरोसा दिलाया था कि सामान अगले दिन रायपुर पहुंचा दिया जाएगा।
रायपुर पहुंचने पर नहीं मिले तीनों बैग
रायपुर एयरपोर्ट पर इंडिगो कर्मचारियों ने पहले बताया कि तीनों बैग उसी फ्लाइट में लोड हो गए हैं और लगेज बेल्ट से मिल जाएंगे। हालांकि, बेल्ट पर पहुंचने के बाद आशुतोष को काला, चेकदार और नीला रंग के तीनों बैग नहीं मिले। उन्हें स्लिप क्रमांक 632881 और 632804 दी गई।
बार-बार पूछताछ के बाद 18 दिसंबर 2015 को इंडिगो ने सामान गुम होने की बात स्वीकार की। इसके बाद 7 जनवरी 2016 को एयरलाइन ने क्षतिपूर्ति देने से इनकार करते हुए कंडीशन ऑफ कैरिज का हवाला दिया।
आयोग ने खारिज किया इंडिगो का बचाव
इंडिगो ने आयोग के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिवादी ने प्रॉपर्टी इरेगुलैरिटी रिपोर्ट (PIR) दर्ज नहीं कराई और चेक-इन के समय सामान में मौजूद कीमती वस्तुओं की घोषणा भी नहीं की थी।
अध्यक्ष ढाकेश्वर प्रसाद शर्मा तथा सदस्य निरूपमा प्रधान और अनिल कुमार अग्निहोत्री की खंडपीठ ने एयरलाइन की दलीलों को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि सामान यात्री ने एयरलाइन के आग्रह पर छोड़ा था और उसे अगले दिन सुरक्षित पहुंचाने का आश्वासन दिया गया था। ऐसे में यात्री को तत्काल यह जानकारी ही नहीं थी कि उसका सामान गुम हो चुका है। आयोग ने इंडिगो के उस ईमेल का भी उल्लेख किया, जिसमें एयरलाइन ने सामान गुम होने पर खेद व्यक्त किया था।
 हालांकि, परिवादी द्वारा सामान में 3.20 लाख रुपये मूल्य की वस्तुएं होने के दावे का ठोस प्रमाण नहीं दिया जा सका। इसलिए आयोग ने प्रति बैग 50 हजार रुपये के हिसाब से कुल 1.50 लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित किया।
45 दिनों में करना होगा भुगतान
20 अगस्त 2026 को जारी आदेश के मुताबिक इंडिगो को 45 दिनों के भीतर 1.50 लाख रुपये, 29 अप्रैल 2016 से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित अदा करने होंगे। इसके अलावा 25 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और 7 हजार रुपये वादव्यय एवं अधिवक्ता शुल्क के रूप में देने होंगे।
परिवादी की ओर से अधिवक्ता अनिकेत लहरी और अपूर्व गोयल ने पैरवी की।

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