रायपुर । झाड़-फूंक और अंधविश्वास के जरिए इलाज करते-करते एक युवती की मौत हो गई। इस मामले में रायपुर कोर्ट ने आरोपी महिला को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 2 लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अभियोजन के अनुसार, प्रार्थिया सुनीता सोनवानी ने 23 मई 2025 को थाना राजिम में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि उसकी 18 वर्षीय बेटी योगिता सोनवानी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, जिसका इलाज रायपुर और महासमुंद में चल रहा था।
इस दौरान गांव में काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि गरियाबंद जिले के ग्राम सुरसाबांधा में रहने वाली ईश्वरी साहू झाड़-फूंक के जरिए इलाज करती है। जनवरी 2025 में सुनीता सोनवानी अपनी बेटी को लेकर आरोपी के घर पहुंची। ईश्वरी साहू ने इलाज के नाम पर युवती के शरीर पर गर्म पानी और जड़ी-बूटी मिश्रित तेल डाला और उसके ऊपर चढ़कर पैर से दबाव बनाया।
परिजन के पूछने पर उसने कहा कि यह ईसा मसीह का चमत्कारिक तेल और गर्म पानी है। वह उनसे ईसा मसीह की प्रार्थना भी करवाती रही और कहती थी कि ईसा मसीह सब ठीक कर देंगे। कुछ देर तक झाड़-फूंक करती रही। इसके बाद परिजनों को घर से बाहर जाने से भी मना कर दिया। उनसे कहा कि इलाज पूरा होने तक इस बारे में किसी को न बताएं, नहीं तो ईसा नाराज हो जाएंगे। इलाज के दौरान युवती की तबीयत बिगड़ती गई, लेकिन आरोपी उसे अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक करती रही। अंततः 22 मई 2025 को युवती की मौत हो गई।
इसके बाद परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि आरोपी द्वारा किए गए कृत्य के कारण ही युवती की मृत्यु हुई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपी महिला गरियाबंद जिले के सुरसाबंधा गांव की रहने वाली है। मृत युवती महासमुंद की रहने वाली थी।
पोस्टमार्टम में क्या मिला
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने कोर्ट को बताया कि युवती के शरीर में गंभीर अंदरूनी चोटें थीं। रिपोर्ट में ये आया सामने –
दाहिने फेफड़े में खून जमा था।
फेफड़े में एयर बबल फट गया था।
तीसरी, चौथी और पांचवीं पसली टूटी हुई थी।
शरीर के अंदर कई चोटें थीं।

