जहां बाघों का शिकार हुआ, वहां के ट्रैप कैमरों का दो महीनों का डेटा डिलीट कर दिया गया

जहां बाघों का शिकार हुआ, वहां के ट्रैप कैमरों का दो महीनों का डेटा डिलीट कर दिया गया

बीजापुर। छत्तीसगढ़ का इंद्रावती टाइगर रिजर्व इन दिनों अपनी सुरक्षा व्यवस्था के संकट से जूझ रहा है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले दो महीनों के भीतर पांच बाघों का शिकार किए जाने की पुष्टि हुई है। इस घटना ने न केवल वन्यजीव सुरक्षा तंत्र की पोल खोल दी है, बल्कि पूरे रिजर्व को बाघ विहीन होने की कगार पर ला खड़ा किया है। जबकि बाघों की सुरक्षा संरक्षण के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि शिकारियों का एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह इस पूरे घटनाक्रम को अंजाम दे रहा था। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि शिकारियों ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा बाघों की निगरानी के लिए लगाए गए ट्रैप कैमरा सिस्टम का भी दुरुपयोग किया। पासेवाड़ा रेंज में लगे कैमरों का पिछले दो महीनों का डेटा डिलीट कर दिया गया था, ताकि शिकार की गतिविधियों को छिपाया जा सके। इस मामले में वन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत की पुष्टि हो रही है।
पासेवाड़ाके कोर रेंज के पेट्रोलिंग गार्ड कुंदन शाह मंडावी ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया है कि उसने ही पांच बाघों का शिकार किया था। इस मामले में पासेवाड़ा के रेंजर कमल कश्यप, डिप्टी रेंजर नरहरि कश्यप और फॉरेस्ट गार्ड विश्वनाथ मांझी को निलंबित कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार वन विभाग के अन्य कर्मचारियों की भी इस गिरोह से मिलीभगत की खबरें सामने आ रही हैं, जिसकी गहन जांच की जा रही है।
पासेवाड़ा को छोड़ बाकी परिक्षेत्र एनजीओ के जिम्मे इंद्रावती टाइगर रिज़र्व में वन्य प्राणियों के डेटा संकलन, अध्ययन और अन्य शोध आदि के लिए नोवा नेचर नाम की एक संस्था को जिम्मेदारी सौंपी गयी है। इस काम के लिए उन्हें टाइगर रिज़र्व की तरफ से अच्छा खासा भुगतान भी किया जा रहा है, लेकिन इनकी टीम को भी इन शिकारियों की इस क्षेत्र में लगातार बढ़ रही सक्रियता का आभास नहीं हो सका। कैमरों के नियंत्रण की जिम्मेदारी इस एनजीओ को ना देकर टाइगर रिज़र्व के कर्मचारियों ने अपने पास क्यों रखा था। अब इसे इत्तेफाक कहें या षडयंत्र कि जिस स्थान पर एनजीओ को काम करने से रोका गया उसी इलाके में पांच बाघों का $कत्ल हुआ। शिकारी कुंदन का घर भी यहीं था। एक बाघ की खाल यहीं से बरामद हुई और जिन ट्रैप कमरों का डेटा डिलीट किया गया वो भी यहीं लगाए गए थे।
नोवा नेचर संस्था के अध्यक्ष एम. सूरज से जब पूछा गया कि जहां बाघों का शिकार हुआ, वहां के ट्रैप कैमरों का डेटा कैसे डिलीट हो गया तो उन्होंने बताया कि पूरे टाइगर रिज़र्व के ट्रैप कैमरों की देखरेख उनकी टीम करती है लेकिन सिर्फ पासेवाड़ा कोर रेंज की जिम्मेदारी टाइगर रिज़र्व के अधिकारियों के पास है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक संदीप बलगा ने बताया कि वन विभाग, महाराष्ट्र पुलिस और छत्तीसगढ़ पुलिस की संयुक्त टीम ने दो दिन पहले बाघ के अंगों की तस्करी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और उनके द्वारा बताए गए ठिकानों पर हमारी टीमें छापेमारी कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *