रायपुर। प्रदेश में इस साल मानसून और खेती कदमताल मिलाकर चल रहे हैं। समय पर मानसून आने और नियमित अंतराल में बारिश होने से खरीफ फसलों को जरूरत के मुताबिक पानी मिला। इसका असर बुआई पर भी दिखा है। 1 सितंबर तक प्रदेश में लक्ष्य के मुकाबले 98% बुआई पूरी हो चुकी है। अब फसलों को पकने के लिए सितंबर की बारिश अहम होगी।
मानसून का कोटा पूरा होने के लिए भी करीब 206 मिमी पानी की जरूरत है। प्रदेश में अब तक 926 मिमी बारिश हो चुकी है और इसका वितरण भी सामान्य है। अधिकांश जिलों में अच्छी बारिश हुई है। केवल पांच जिले कम बारिश की श्रेणी में हैं, जहां अधिकतम कमी करीब 40% है।
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक लौटते मानसून से इतनी बारिश मिलने की संभावना है, इसलिए फिलहाल फसलों को लेकर ज्यादा चिंता की स्थिति नहीं है। कृषि विभाग ने इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर में बुआई का लक्ष्य रखा था। इसमें 47.63 लाख हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी है।
आषाढ़ से शुरू होने वाली बुआई पूरे सावन चलती है। भादो लगने के बाद इसका काम लगभग थम जाता है। प्रदेश में आमतौर पर 90 से 100 दिन में तैयार होने वाली फसलें लगाई जाती हैं।
गंगीय पश्चिम बंगाल, उत्तरी तटीय ओडिशा, झारखंड और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के आसपास निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। इसके अलावा दक्षिण गुजरात से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ होते हुए द्रोणिका बनी है। इससे प्रदेश में बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी।
मौसम विभाग ने 2 सितंबर को कोरिया, बिलासपुर, कोरबा, बेमेतरा और राजनांदगांव में यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कबीरधाम, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में ऑरेंज अलर्ट है। इन इलाकों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना है।

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